नारायणपुर: छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र का दुर्गम गांव कोड़ेनार आखिरकार शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ गया है। 25 फरवरी का दिन गांव के इत...
नारायणपुर:
छत्तीसगढ़ के अबूझमाड़ क्षेत्र का दुर्गम गांव कोड़ेनार आखिरकार शिक्षा की
मुख्यधारा से जुड़ गया है। 25 फरवरी का दिन गांव के इतिहास में स्वर्ण
अक्षरों में दर्ज हो गया, जब यहां पहली बार नियमित स्कूल का शुभारंभ हुआ।
आजादी के बाद यह पहला अवसर है, जब इस सुदूर अंचल के बच्चों को अपने ही गांव
में शिक्षा का अधिकार मिला है।
सिर्फ 14 परिवारों वाले इस छोटे से
गांव में दशकों तक स्कूल की सुविधा नहीं थी। सर्वेक्षण में 25 ऐसे बच्चों
की पहचान की गई, जो शिक्षा से वंचित थे। उन्हें पढ़ाई के लिए 6 से 7
किलोमीटर दूर घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी रास्तों को पार कर दूसरे
गांव जाना पड़ता था। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सुरक्षा जोखिमों के
कारण अधिकांश बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पाते थे।
उद्घाटन
के अवसर पर पूरा गांव उत्सव के माहौल में नजर आया। जनपद उपाध्यक्ष
मंगडूराम नुरेटी, अबूझमाडिया समाज के अध्यक्ष रामजी ध्रुव, सरपंच-सचिव तथा
जिला शिक्षा अधिकारी अशोक कुमार पटेल की उपस्थिति में पहली बार कोड़ेनार की
धरती पर सामूहिक राष्ट्रगान गूंजा। भावुक क्षण में सभी 25 बच्चों का
विधिवत शाला प्रवेश कराया गया। बच्चों को नि:शुल्क गणवेश, स्कूल बैग,
पाठ्यपुस्तकें, कॉपियां और पहाड़ा पुस्तिकाएं वितरित की गईं।
कलेक्टर
नम्रता जैन के मार्गदर्शन में शुरू हुई इस पहल को ग्रामीणों ने विकास की
नई किरण बताया है। शिक्षक की नियुक्ति के साथ अब यहां नियमित कक्षाएं
संचालित होंगी। यह पहल अबूझमाड़ के विकास और बच्चों के सुनहरे भविष्य की
दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है।
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