नई दिल्ली । डेनमार्क की राष्ट्रीय डाक सेवा, पोस्टनॉर्ड (PostNord) ने आधिकारिक तौर पर घरेलू पत्र वितरण सेवा को रोक दिया है। कभी संवाद का...
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दिल्ली । डेनमार्क की राष्ट्रीय डाक सेवा, पोस्टनॉर्ड (PostNord) ने
आधिकारिक तौर पर घरेलू पत्र वितरण सेवा को रोक दिया है। कभी संवाद का मुख्य
जरिया रही फिजिकल चिट्ठियां अब इस देश में डिजिटल माध्यमों के सामने अपनी
प्रासंगिकता खो चुकी हैं। अब यहां के नागरिक पूरी तरह से ईमेल, मैसेज और
अन्य इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर निर्भर हो चुके हैं।
चिट्ठियों की संख्या में 90% की भारी गिरावट
डाक सेवा बंद करने का मुख्य कारण पिछले दो दशकों में चिट्ठियों की मांग में आई जबरदस्त कमी है...
आंकड़ों का अंतर: साल 2000 में जहां पोस्टनॉर्ड ने लगभग 1.5 अरब चिट्ठियां
पहुंचाई थीं, वहीं पिछले साल यह आंकड़ा गिरकर महज 11 करोड़ पर सिमट गया।
डिजिटलाइजेशन: पोस्टनॉर्ड की प्रेस प्रमुख इसाबेला बेक जोर्गेनसेन के
अनुसार, डेनमार्क दुनिया के सबसे डिजिटल देशों में से एक है। यहां सरकारी
कामकाज से लेकर निजी संवाद तक सब कुछ ऑनलाइन होता है।
बदलाव: पिछले 25 वर्षों में भौतिक पत्रों की संख्या में 90 फीसदी की कमी दर्ज की गई है।
नीलाम हुए मशहूर 'लाल डाकबॉक्स'
इस सेवा के बंद होने के साथ ही डेनमार्क की पहचान बन चुके 1500 लाल डाकबॉक्सों (Postboxes) को भी हटाया जा रहा है...
बिक्री: जून से इन बॉक्सों को हटाने की प्रक्रिया शुरू हुई, जिनमें से 1000 बॉक्स चैरिटी के लिए बेचे गए।
कीमत और क्रेज: एक डाकबॉक्स की कीमत लगभग 472 डॉलर (करीब 40 हजार रुपये)
रखी गई थी। दिलचस्प बात यह है कि लाखों लोगों की भारी दिलचस्पी के कारण ये
सभी बॉक्स महज 3 घंटे में बिक गए।
डेनमार्क का यह कदम दुनिया को यह
संदेश देता है कि भविष्य पूरी तरह डिजिटल है, जहां सदियों पुरानी परंपराएं
अब केवल यादों और संग्रहालयों का हिस्सा रह जाएंगी।
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