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'कैच द रेन': छत्तीसगढ़ जल संरक्षण में देश में अव्वल

  रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ ने देश भर में जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का लोहा मनवाते हुए एक नया कीर्तिमान स्थाप...

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रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ ने देश भर में जल संरक्षण के क्षेत्र में अपनी उत्कृष्ट कार्यप्रणाली का लोहा मनवाते हुए एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के 'जल संचय जन भागीदारी' (JSJB) और 'कैच द रेन' अभियानों के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ देश भर में शीर्ष स्थान पर रहा है. 


राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, इस अभियान के तहत राज्य में लगभग 78 हजार जल निकायों और संरक्षण संरचनाओं का निर्माण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है.


नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के राष्ट्रीय सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ के इस सफल वाटर कंजर्वेशन मॉडल को देश के सामने प्रस्तुत किया. 


इस अवसर पर राज्य के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने भी वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के रखरखाव से जुड़ी राज्य की दूरगामी पहलों का विस्तृत खाका रखा.


छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण आंदोलन पूरी तरह से सामुदायिक भागीदारी पर टिका है. राज्य ने JSJB के पहले चरण में 4 लाख से अधिक और दूसरे चरण में लगभग 23 लाख से अधिक जल निकायों का निर्माण पूरा किया है. वहीं तीसरे चरण में दर्ज कुल 79,775 संरचनाओं में से 77,719 का कार्य पूर्ण कर राज्य ने राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान हासिल किया है.


इस सफलता में कोरिया जिले के अनूठे '5 प्रतिशत मॉडल' की अहम भूमिका रही है, जिसके तहत स्थानीय किसानों ने अपनी 5 फीसदी कृषि भूमि जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से समर्पित की है. 


इसके अतिरिक्त, देश के शीर्ष 10 जल संरक्षण वाले जिलों में छत्तीसगढ़ के पांच जिलों-सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम-ने जगह बनाई है. राज्य में हो रहे इन लगातार प्रयासों के चलते भूजल संकट से जूझ रहे 'क्रिटिकल' और 'सेमी-क्रिटिकल' विकासखंडों की संख्या घटकर 26 से 19 पर आ गई है.

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